CG Highcourt: मेंटल हॉस्पिटल पर हाईकोर्ट सख्त, स्वास्थ्य सचिव से मांगा नियमित नियुक्तियों का रोडमैप
बिलासपुर के सकरी (सेंदरी) स्थित छत्तीसगढ़ के एकमात्र राजकीय मानसिक चिकित्सालय की बदहाली पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार किया है। कोर्ट ने शासन द्वारा पेश किए गए जवाब को नाकाफी बताते हुए दो टूक कहा कि संविदा नियुक्तियां किसी बड़ी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकतीं।

CG Highcourt।बिलासपुर।छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्रदेश के इकलौते सरकारी मानसिक अस्पताल की दुर्दशा पर राज्य सरकार की जमकर क्लास लगाई है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि केवल संविदा (Contractual) आधार पर डॉक्टरों की भर्ती कर मरीजों की समस्याओं को हल नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के सचिव को निर्देश दिया है कि वे 24 मार्च 2026 तक नया शपथपत्र पेश कर नियमित भर्ती की निश्चित समय-सीमा बताएं।
सुनवाई के दौरान जब शासन ने बताया कि 2 जनवरी 2026 के आदेश से दो एमडी मनोचिकित्सकों की संविदा नियुक्ति की गई है, तो कोर्ट इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ।
डिवीजन बेंच ने कहा कि अस्पताल में विशेषज्ञों और स्टाफ की भारी कमी है, जिसे दूर करने के लिए ठोस और स्थायी कदम उठाने होंगे। न्यायमित्र (Amicus Curiae) ने भी कोर्ट को बताया कि स्वास्थ्य सचिव के जवाब में भविष्य की भर्ती प्रक्रिया, इंटरव्यू की तारीख और व्यावहारिक समस्याओं के समाधान का कोई स्पष्ट जिक्र नहीं है।
स्वास्थ्य सचिव के शपथपत्र में एक चौंकाने वाला खुलासा भी हुआ। बताया गया कि मनोचिकित्सकों की नियमित भर्ती के लिए अप्रैल 2025 में विज्ञापन जारी किया गया था, लेकिन दस्तावेज सत्यापन के दौरान अधिकांश अभ्यर्थी अनुपस्थित रहे।
जो उपस्थित हुए, वे अयोग्य पाए गए।इस कारण भर्ती प्रक्रिया को बीच में ही स्थगित करना पड़ा।
सरकार ने विभिन्न पदों की भर्ती को लेकर ताजा अपडेट साझा किया है।जिनमें पैथोलॉजी विशेषज्ञ भर्ती प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और चयन सूची जारी कर दी गई है।
क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट और काउंसलर, भर्ती प्रक्रिया छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) के पास लंबित है।
वार्ड बॉय और वार्ड आया, व्यापमं ने भर्ती परीक्षा पूरी कर ली है; जल्द ही नियुक्ति आदेश जारी होंगे।
कोर्ट द्वारा नियुक्त कमिश्नर एडवोकेट ऋषि राहुल सोनी ने अस्पताल का निरीक्षण कर बताया कि वहां न केवल डॉक्टरों की कमी है, बल्कि मरीजों के लिए साफ-सफाई और बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है।
कोर्ट ने अब सरकार को अल्टीमेटम दिया है कि वे कागजी कार्रवाई के बजाय धरातल पर सुधार करें।







